गया में पिंडदान क्यों जरूरी माना जाता है?
की चेकलिस्ट
वायु पुराण: गया में पिंडदान = पितरों को सीधा मोक्ष। ब्रह्मा वरदान। गरुड़ पुराण: 7 पीढ़ी मोक्ष। विष्णुपद मंदिर + फल्गु नदी। श्रीराम ने भी दशरथ के लिए गया में पिंडदान किया।
- 1वायु पुराण/गया महात्म्य: गयासुर (एक दैत्य) ने कठोर तपस्या की। उसके शरीर पर भगवान विष्णु ने पैर रखा — वह स्थान विष्णुपद कहलाया। ब्रह्मा जी ने वरदान दिया: 'गया में पिंडदान करने से पितर सीधे मोक्ष पाएंगे।'
- 2गरुड़ पुराण: गया में एक बार पिंडदान = सात पीढ़ियों के पितरों को मोक्ष।
- 3फल्गु नदी — गया की पवित्र नदी। इसके तट पर पिंडदान अत्यंत फलदायक।
- 4विष्णुपद मंदिर — भगवान विष्णु के चरण चिह्न। यहाँ पिंडदान = पितर सीधे विष्णुलोक।
- 5श्रीराम ने भी गया में पिंडदान किया — अपने पिता दशरथ के लिए (रामायण)।
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