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ग्रहण काल में गर्भवती महिला को क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?

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गर्भवती ग्रहण नियम: बाहर न जाएँ, ग्रहण न देखें, कैंची-चाकू-सुई वर्जित, मंत्र जप (संतान गोपाल/गायत्री), दूर्वा रखें, मोक्ष बाद स्नान। स्वास्थ्य सर्वोपरि — भूख-प्यास पर भोजन-जल लें। वैज्ञानिक: सीधा ग्रहण देखना हानिकारक।

  1. 1बाहर न निकलें: ग्रहण काल में गर्भवती महिला को घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए, विशेषतः ग्रहण की ओर नहीं देखना चाहिए।
  2. 2कैंची-चाकू-सुई: ग्रहण काल में कैंची, चाकू, सुई आदि नुकीली/तीक्ष्ण वस्तुओं का प्रयोग वर्जित माना जाता है। मान्यता है कि इससे गर्भ को कष्ट हो सकता है।
  3. 3भोजन: सूतक काल में भोजन वर्जित है। किन्तु गर्भवती महिला को स्वास्थ्य कारणों से आवश्यकता पड़ने पर भोजन-जल लेने की छूट है — स्वास्थ्य सर्वोपरि।
  4. 4मंत्र जप: गर्भवती महिला ग्रहण काल में 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' या गायत्री मंत्र या संतान गोपाल मंत्र का जप करें। यह गर्भ रक्षा हेतु अत्यंत शुभ।
  5. 5दूर्वा (दूब घास): कुछ परम्पराओं में गर्भवती महिला को ग्रहण काल में हाथ में दूर्वा रखने या कमर में बाँधने का विधान है।
  6. 6स्नान: ग्रहण मोक्ष के बाद स्नान करें।
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