तुलसी ग्रहण में: धार्मिक — तुलसी सर्वाधिक पवित्र, अशुद्धि प्रवेश नहीं करती, अन्नशोधक। वैज्ञानिक — जीवाणुनाशक (यूजेनॉल), एंटीऑक्सीडेंट, प्राकृतिक परिरक्षक। विधि: सूतक से पहले सभी खाद्य पदार्थों में तुलसी डालें।
- 1तुलसी = पवित्रता: पद्म पुराण के अनुसार तुलसी सर्वाधिक पवित्र पौधा है। जहाँ तुलसी है, वहाँ अशुद्धि प्रवेश नहीं करती। तुलसी भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है।
- 2ग्रहण अशुद्धि निवारण: मान्यता है कि ग्रहण काल में वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। तुलसी पत्र भोजन में डालने से यह नकारात्मकता भोजन को प्रभावित नहीं करती।
- 3अन्नशुद्धि: तुलसी को 'अन्नशोधक' (भोजन शुद्ध करने वाला) माना गया है। शास्त्रों में कहा गया है कि तुलसी युक्त भोजन सदैव पवित्र रहता है।
- 4जीवाणुनाशक (Antibacterial): तुलसी में यूजेनॉल, कैम्फीन, सिनेओल जैसे तत्व होते हैं जो प्रबल जीवाणुनाशक हैं। ये भोजन में हानिकारक बैक्टीरिया की वृद्धि रोकते हैं।
- 5एंटीऑक्सीडेंट: तुलसी में शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट हैं जो भोजन को ऑक्सीकरण (खराब होने) से बचाते हैं।
- 6प्राकृतिक परिरक्षक (Natural Preservative): तुलसी पत्र भोजन में डालने से भोजन अधिक समय तक ताजा और सुरक्षित रहता है।