गृहस्थ मोक्ष संभव और श्रेष्ठ — राजा जनक प्रमाण। गीता 3.4-7 — निष्काम कर्मी गृहस्थ अकर्मण्य संन्यासी से श्रेष्ठ। उपाय: निष्काम कर्म, ईश्वरार्पण, भक्ति, सेवा, स्वाध्याय, कमल पत्र जैसे संसार में रहो पर चिपको मत।
- 1गीता 3.4-7 — कृष्ण ने स्पष्ट कहा कि कर्म न करने से (संन्यास मात्र से) सिद्धि नहीं मिलती। निष्काम कर्म में लगा गृहस्थ अकर्मण्य संन्यासी से श्रेष्ठ है।
- 2गीता 5.6-7 — 'योगयुक्तो विशुद्धात्मा विजितात्मा जितेन्द्रियः। सर्वभूतात्मभूतात्मा कुर्वन्नपि न लिप्यते।।' — योगी (विशुद्ध, जितेंद्रिय) कर्म करते हुए भी लिप्त नहीं होता।
- 3राजा जनक — सबसे प्रसिद्ध उदाहरण। मिथिला के राजा, गृहस्थ, विराट शासन — फिर भी जीवनमुक्त। 'जनकवत्' = जनक की तरह — यह मुहावरा ही गृहस्थ मोक्ष का प्रमाण है।
- 4निष्काम कर्म — कर्तव्य करो, फल ईश्वर पर छोड़ो (गीता 2.47)।
- 5ईश्वरार्पण — सब कर्म ईश्वर को अर्पित (गीता 9.27)।
- 6गृहस्थ भक्ति — नित्य पूजा, जप, कीर्तन, सत्संग।
- 7सेवा — परिवार, समाज, जरूरतमंदों की सेवा = ईश्वर सेवा।