गुप्त नवरात्रि तंत्र: 'गुप्त' शक्ति=तीव्र (भूमिगत नदी जैसी), ब्रह्माण्डीय शक्तिपात काल, दश महाविद्या सर्वोत्तम, एकांत=गहन, मंत्र सिद्धि शीघ्र (कुलार्णव), ऋतु सन्धि=ऊर्जा तीव्र। गुरु दीक्षा अनिवार्य। सामान्य=सप्तशती/नवार्ण सुरक्षित।
- 1'गुप्त' = गोपनीय शक्ति: गुप्त नवरात्रि = प्रकट नवरात्रि (चैत्र/शारदीय) से भिन्न — इनकी शक्ति गुप्त (hidden) किन्तु अत्यंत तीव्र। जैसे भूमिगत नदी (सरस्वती) = दिखती नहीं, शक्ति अपार।
- 2ब्रह्माण्डीय ऊर्जा: इन 9 दिनों में ब्रह्माण्डीय शक्ति (cosmic energy) का विशेष प्रवाह माना जाता है — तांत्रिक ग्रंथों में इसे 'शक्तिपात काल' कहा।
- 3दश महाविद्या: गुप्त नवरात्रि = दश महाविद्याओं (काली, तारा, षोडशी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी, कमला) की साधना का सर्वोत्तम काल। ये देवियाँ = शक्ति के गुप्त/उग्र स्वरूप।
- 4कम भीड़ = गहन साधना: प्रकट नवरात्रि = सार्वजनिक उत्सव (पण्डाल, मेला)। गुप्त = कम लोग जानते = एकांत साधना सम्भव = गहन।
- 5मंत्र सिद्धि: कुलार्णव तंत्र: गुप्त नवरात्रि में सवालक्ष (1,25,000) जप = मंत्र सिद्ध। सामान्य काल में यही जप अधिक संख्या में चाहिए।
- 6ऋतु सन्धि: माघ = शीत-वसंत सन्धि। आषाढ़ = ग्रीष्म-वर्षा सन्धि। ऋतु सन्धि = प्रकृति अस्थिर = ऊर्जा तीव्र = साधना प्रभावी।