हवन में स्वाहा बोलने का क्या अर्थ है?
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'सु+आहा'='अच्छी तरह अर्पित।' अग्नि=देवमुख, स्वाहा=अग्नि पत्नी (पुराण)। 'हे अग्नि, देवता तक पहुंचाओ!' 'इदं न मम'='मेरा नहीं'=समर्पण। बिना स्वाहा=अधूरी।
- 1अग्नि = देवमुख: अग्नि = देवताओं का मुख। 'स्वाहा' = 'हे अग्नि, यह देवता तक पहुंचाओ!'
- 2स्वाहा = अग्नि पत्नी: पुराण: स्वाहा = अग्नि देवता पत्नी। उनका नाम = आहुति शक्ति।
- 3समर्पण: 'स्वाहा' = 'मैं समर्पित करता हूं' — अहंकार त्याग।
- 4'इदं न मम': 'यह मेरा नहीं' = पूर्ण समर्पण।
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हवन/यज्ञ
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