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चेकलिस्ट

हिंदू धर्म में स्त्री का स्थान शास्त्रों के अनुसार

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वैदिक काल में स्त्रियां विदुषी (गार्गी, मैत्रेयी), वेद रचयिता थीं। मनुस्मृति 3.56 — 'जहां नारी पूजित, वहां देवता।' देवी पूजा और अर्धनारीश्वर हिंदू धर्म की विशिष्टता। गीता 9.32 — स्त्री भी परम गति प्राप्त। कुछ स्मृतियों में प्रतिबंध हैं — ये कालानुसार हैं, शाश्वत नहीं।

  1. 1मनुस्मृति 3.56 — 'यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः' — जहां नारियों की पूजा होती है, वहां देवता निवास करते हैं। (विस्तार अगले प्रश्न में)
  2. 2ऋग्वेद — वैदिक काल में स्त्रियां विदुषी थीं। गार्गी, मैत्रेयी, लोपामुद्रा, अपाला, घोषा जैसी ऋषिकाओं ने वैदिक सूक्तों की रचना की। ब्रह्मवादिनी (वेद अध्ययन करने वाली) स्त्रियां थीं।
  3. 3बृहदारण्यक उपनिषद — गार्गी ने याज्ञवल्क्य से दार्शनिक शास्त्रार्थ किया। मैत्रेयी ने आत्मज्ञान चुना धन के बजाय।
  4. 4देवी पूजा — शक्ति (देवी/दुर्गा/लक्ष्मी/सरस्वती) की पूजा हिंदू धर्म की विशिष्टता है। ईश्वर स्त्री रूप में भी पूजित — यह विश्व के अधिकांश धर्मों में नहीं है।
  5. 5अर्धनारीश्वर — शिव-शक्ति एकत्व: ईश्वर स्वयं आधा पुरुष, आधा स्त्री।
  6. 6लक्ष्मी तंत्र — 'स्त्रीषु नारायणी शक्तिः' — स्त्रियों में नारायणी शक्ति का वास है।
  7. 7कुछ स्मृति ग्रंथों (मनुस्मृति के अन्य श्लोकों) में स्त्रियों पर प्रतिबंध, स्वतंत्रता सीमित करने, और पुरुष अधीनता के वर्णन भी हैं।
  8. 8ये वर्णन कालानुसार सामाजिक स्थिति को दर्शाते हैं, शाश्वत धार्मिक आदेश नहीं।
  9. 9अनेक विद्वान मानते हैं कि स्मृतियों में बाद में प्रक्षेप (interpolation) हुए हैं।
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