जीवात्मा और परमात्मा में क्या अंतर है?
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मुण्डक उपनिषद (3.1.1): दो पक्षी — जीवात्मा (फल खाता) और परमात्मा (साक्षी)। जीवात्मा = अणु, कर्मबद्ध, माया प्रभावित। परमात्मा = सर्वव्यापक, सर्वज्ञ, माया स्वामी। गीता (15.7): जीव ईश्वर का अंश। अद्वैत: दोनों एक, द्वैत: सदा भिन्न।
- 1एक वृक्ष पर दो पक्षी बैठे हैं। एक (जीवात्मा) फल खा रहा है (कर्मफल भोग रहा है), दूसरा (परमात्मा) केवल साक्षी रूप में देख रहा है, फल नहीं खाता।
- 2अद्वैत (शंकर): जीवात्मा = परमात्मा, भेद केवल अज्ञान (माया) के कारण। ज्ञान होने पर भेद समाप्त = मोक्ष।
- 3विशिष्टाद्वैत (रामानुज): जीवात्मा परमात्मा का अंश, भिन्न पर निर्भर। शरीर-आत्मा संबंध।
- 4द्वैत (मध्व): जीवात्मा और परमात्मा सदा भिन्न। मोक्ष में भी भेद बना रहता है।
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