महानिर्वाण तंत्र — कलियुग में मंत्र जप सर्वाधिक प्रभावी (सतयुग=ध्यान, त्रेता=यज्ञ, द्वापर=पूजा)। कारण: आयु-शक्ति-एकाग्रता कम, अतः सरल मार्ग। 'कलियुग केवल नाम अधारा।' सावधानी: तंत्र ≠ काला जादू; गुरु आवश्यक; सात्विक तंत्र ही शास्त्रसम्मत।
- 1महानिर्वाण तंत्र में कहा गया है कि सतयुग में ध्यान, त्रेता में यज्ञ, द्वापर में पूजा और कलियुग में मंत्र जप सर्वाधिक प्रभावी है।
- 2कुलार्णव तंत्र (1.25) — 'कलौ तन्त्रोक्तमार्गेण सिद्धिर्भवति नान्यथा' — कलियुग में तंत्र मार्ग से ही सिद्धि होती है, अन्यथा नहीं।
- 3मानवीय क्षमता का ह्रास — कलियुग में मनुष्य की आयु (100 वर्ष), शक्ति, एकाग्रता और तप शक्ति सतयुग की तुलना में अत्यंत कम है। लंबी तपस्या (हजारों वर्ष) संभव नहीं — अतः मंत्र/तंत्र का सरल मार्ग।
- 4नाम जप की महिमा — कलियुग में भगवान का नाम स्मरण सबसे प्रभावी साधना माना गया है। 'कलियुग केवल नाम अधारा' — भक्ति और मंत्र जप से वह फल मिलता है जो सतयुग में दीर्घ तपस्या से मिलता था।
- 5कलियुग की कृपा — विरोधाभासी लगता है, परंतु शास्त्रों में कलियुग को 'सबसे सरल मोक्ष युग' भी कहा गया है — क्योंकि केवल नाम स्मरण पर्याप्त है।
- 6तंत्र ≠ काला जादू — शास्त्रीय तंत्र एक साधना पद्धति है (देवी उपासना, मंत्र, यंत्र, न्यास)। इसे अंधविश्वास या काले जादू से भ्रमित न करें।