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क्रीं = महाकाली का परम बीज (कालीकुल परंपरा)। क् (काली) + र् (ब्रह्म) + ई (महामाया) + अनुस्वार (नादशक्ति)। कार्य: शत्रु-निवारण, अहंकार-नाश, कुण्डलिनी जागरण। उग्र शक्ति — गुरु-दीक्षा के बिना जप वर्जित। 'ॐ क्रीं काल्यै नमः' — सुरक्षित रूप।
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