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चेकलिस्ट

माँ छिन्नमस्ता कौन हैं और उनका स्वरूप कैसा है?

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माँ छिन्नमस्ता = दस महाविद्याओं में उग्र और रहस्यमयी देवी। स्वरूप: स्वयं खड्ग से मस्तक काटकर हाथ में धारण। कटे धड़ से तीन रक्त धाराएँ — एक स्वयं पीती हैं, दो डाकिनी-वर्णिनी के मुख में। 'वज्र वैरोचिनी' भी कहते हैं। काली कुल की देवी।

  1. 1वे अपना मस्तक स्वयं अपने खड्ग से काटकर अपने एक हाथ में धारण करती हैं, जबकि दूसरे हाथ में खड्ग होता है।
  2. 2उनके कटे हुए धड़ से रक्त की तीन धाराएँ निकलती हैं — एक धारा को वे स्वयं पीती हैं, और अन्य दो धाराएँ उनकी सहचरियों डाकिनी और वर्णिनी (जिन्हें जया और विजया भी कहा जाता है) के मुख में जाती हैं।
  3. 3वे प्रचंड चंडिका का स्वरूप हैं और वज्र वैरोचिनी के नाम से भी जानी जाती हैं।
  4. 4उनकी गणना काली कुल की देवियों में होती है।
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