का सरल उत्तर
माँ छिन्नमस्ता = दस महाविद्याओं में उग्र और रहस्यमयी देवी। स्वरूप: स्वयं खड्ग से मस्तक काटकर हाथ में धारण। कटे धड़ से तीन रक्त धाराएँ — एक स्वयं पीती हैं, दो डाकिनी-वर्णिनी के मुख में। 'वज्र वैरोचिनी' भी कहते हैं। काली कुल की देवी।
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