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श्राद्ध तत्त्व की व्याख्या के अनुसार मातामह श्राद्ध तभी करें जब दौहित्र की माता जीवित हो और सौभाग्यवती (सधवा = पति जीवित) अवस्था में हो। माता या पिता में से किसी एक का निधन हो चुका हो तो कुछ विशिष्ट देशाचारों में यह श्राद्ध वर्जित माना गया है।
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