माँ त्रिपुर सुंदरी स्वरूप: अरुण/सिंदूरी वर्ण। तीन नेत्र, चार भुजाएँ। हाथों में पाश (मोह), अंकुश (नियंत्रण), इक्षु-धनुष (मन), पंच पुष्प-बाण (पांच ज्ञानेंद्रियाँ)। पाँच मुख (तंत्र शास्त्र)। शिव की गोद में विराजमान।
- 1वर्ण: उदयकालीन सूर्य के समान अरुण या सिंदूरी।
- 2नेत्र: तीन नेत्र।
- 3भुजाएँ: चार भुजाएँ।
- 4हाथों में: पाश (मोह का प्रतीक), अंकुश (नियंत्रण का प्रतीक), इक्षु-धनुष (मन का प्रतीक) और पंच पुष्प-बाण (पांच ज्ञानेंद्रियों के विषयों के प्रतीक)।
- 5तंत्र शास्त्रों में उनके पाँच मुखों का भी वर्णन मिलता है, जो विभिन्न दिशाओं और तत्त्वों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
- 6वे प्रायः भगवान शिव की गोद में या उन पर विराजमान चित्रित की जाती हैं।
- 7ध्यान श्लोक में: दस सहस्र बाल सूर्यों के समान तेज, रक्तिम वस्त्र, विविध अलंकार, मस्तक पर अर्धचंद्र।