महामृत्युंजय मंत्र का जप कब और कैसे करें?
की चेकलिस्ट
महामृत्युंजय जप विधान: रुद्राक्ष की लाल धागे वाली माला, लाल आसन, उत्तर दिशा, ब्रह्म मुहूर्त (4 बजे सुबह) सर्वोत्तम। 108 बार (एक माला) जप से: अकाल मृत्यु भय नाश, व्याधि शमन, जीवन-ऊर्जा प्राप्ति।
- 1रुद्राक्ष की लाल धागे वाली माला से जप करें।
- 2लाल आसन पर बैठकर, उत्तर दिशा की ओर मुख करके जप करें।
- 3ब्रह्म मुहूर्त (प्रातः ४:०० बजे) इसका जप सर्वोत्तम माना गया है।
- 4अकाल मृत्यु के भय का समूल नाश होता है
- 5व्याधियों का शमन होता है
- 6असीम जीवन-ऊर्जा प्राप्त होती है।
सम्पूर्ण उत्तर
विस्तृत प्रश्न पृष्ठ देखें
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
श्रेणी
मंत्र जप
इस श्रेणी के अन्य प्रश्नोत्तर।