मेरु पर्वत (ब्रह्मांड अक्ष), ऊर्ध्वगमन (मन+ऊर्जा ऊपर), एंटीना (ब्रह्मांडीय→गर्भगृह), दूर दर्शन, स्वर्ग मार्ग (पृथ्वी↔स्वर्ग), कलश=अमृत। नागर=वक्र, द्राविड़=सीधा।
- 1मेरु पर्वत: शिखर = मेरु (ब्रह्मांड अक्ष) — मंदिर = पृथ्वी पर मेरु का प्रतीक।
- 2ऊर्ध्वगमन: ऊंचा = ऊर्जा ऊपर → सहस्रार/ब्रह्म। भक्त दृष्टि ऊपर = मन ऊर्ध्व।
- 3एंटीना: शिखर = ब्रह्मांडीय ऊर्जा ग्रहण → गर्भगृह में केंद्रित।
- 4दूर से दिखे: ऊंचा = दूर से दर्शन — भक्तों को मार्ग।
- 5स्वर्ग मार्ग: शिखर → आकाश → स्वर्ग — पृथ्वी+स्वर्ग जोड़ने वाला।
- 6कलश: शिखर पर कलश = अमृत = पूर्णता।