सर्वोत्तम: 'भक्ति दो, सद्बुद्धि दो, तुम्हारी इच्छा = मेरी इच्छा' (निष्काम)। शुभ: स्वास्थ्य, संतान, शिक्षा, ईमानदार आजीविका, संकट मुक्ति। न मांगें: किसी का अहित, अनैतिक इच्छा, अत्यधिक लोभ, ईर्ष्या-प्रेरित। गीता: निष्काम भक्त का योगक्षेम भगवान स्वयं वहन करते हैं।
- 1आर्त — संकट में पड़ा (संकट से मुक्ति माँगता है)
- 2अर्थार्थी — धन/भौतिक सुख चाहने वाला
- 3जिज्ञासु — ज्ञान चाहने वाला
- 4ज्ञानी — कुछ न माँगे, केवल भगवान को चाहे
- 5जो अनन्य भाव से मेरा चिन्तन करता है, उसके योगक्षेम (प्राप्ति+रक्षा) मैं स्वयं वहन करता हूँ।
- 6'भगवान, मुझे भक्ति दो' — भक्ति ही सब कुछ है
- 7'मुझे सद्बुद्धि दो'
- 8'मुझे धर्म के मार्ग पर रखो'
- 9'जो तुम्हारी इच्छा — वही मेरी इच्छा'
- 10कुछ न मांगो — केवल दर्शन का आनन्द
- 11परिवार का स्वास्थ्य और सुख
- 12संतान सुख
- 13शिक्षा/ज्ञान
- 14ईमानदार आजीविका
- 15संकट से मुक्ति
- 16रोग निवारण
- 17बुरी आदतों से छुटकारा
- 18किसी का अहित/हानि
- 19शत्रु का विनाश (रक्षात्मक प्रार्थना = उचित, आक्रामक = अनुचित)
- 20अनैतिक इच्छा पूर्ति
- 21चोरी/धोखाधड़ी में सफलता
- 22अत्यधिक धन/ऐश्वर्य (लोभ-प्रेरित)
- 23सौन्दर्य/शक्ति (अहंकार-प्रेरित)
- 24परस्त्री/परपुरुष प्राप्ति
- 25प्रतिस्पर्धी की हार
- 26ईर्ष्या-प्रेरित कामना
- 27मैं और कुछ नहीं मांगता, बस राम के चरण कमलों में सदा प्रेम हो।