मंदिर में दीपदान करने का क्या विशेष महत्व है?
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अग्निपुराण: 'दीपदान = व्रत+योग+मोक्ष।' मंदिर में दीपदान = लक्ष्मी कृपा, दीर्घायु, नेत्र ज्योति, अकाल मृत्यु से रक्षा। घी+तिल = अश्वमेध समान। विधि: मिट्टी दीया+घी/तिल तेल → संकल्प मंत्र → देवता के सामने। कार्तिक सर्वश्रेष्ठ। दीपक ही सम्पूर्ण पूजा।
- 1मिट्टी/ताँबा/पीतल/चाँदी का दीपक लें (मिट्टी सर्वसुलभ)
- 2शुद्ध गो-घृत (घी) या तिल तेल भरें
- 3रुई/कपास की बत्ती बनाएँ
- 4मंदिर में देवता के सामने या दीपस्तंभ पर जलाएँ
- 5संकल्प मंत्र: 'ॐ दीपं ज्योतिः परब्रह्म दीपं सर्वतमोपहम्। दीपेन साध्यते सर्वं सन्ध्यादीपं नमोऽस्तुते।।'
- 6'ॐ नमो नारायणाय' या 'ॐ नमः शिवाय' जप करें
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मंदिर दान
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