ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
चेकलिस्ट

मंदिर में दीपदान करने का क्या विशेष महत्व है?

की चेकलिस्ट

अग्निपुराण: 'दीपदान = व्रत+योग+मोक्ष।' मंदिर में दीपदान = लक्ष्मी कृपा, दीर्घायु, नेत्र ज्योति, अकाल मृत्यु से रक्षा। घी+तिल = अश्वमेध समान। विधि: मिट्टी दीया+घी/तिल तेल → संकल्प मंत्र → देवता के सामने। कार्तिक सर्वश्रेष्ठ। दीपक ही सम्पूर्ण पूजा।

  1. 1मिट्टी/ताँबा/पीतल/चाँदी का दीपक लें (मिट्टी सर्वसुलभ)
  2. 2शुद्ध गो-घृत (घी) या तिल तेल भरें
  3. 3रुई/कपास की बत्ती बनाएँ
  4. 4मंदिर में देवता के सामने या दीपस्तंभ पर जलाएँ
  5. 5संकल्प मंत्र: 'ॐ दीपं ज्योतिः परब्रह्म दीपं सर्वतमोपहम्। दीपेन साध्यते सर्वं सन्ध्यादीपं नमोऽस्तुते।।'
  6. 6'ॐ नमो नारायणाय' या 'ॐ नमः शिवाय' जप करें
सम्पूर्ण उत्तर
विस्तृत प्रश्न पृष्ठ देखें

मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।

श्रेणी
मंदिर दान

इस श्रेणी के अन्य प्रश्नोत्तर।