एकादश रुद्राभिषेक: 11 पुरोहित × 11 बार रुद्र पाठ = 121 पाठ + शिवलिंग अभिषेक। सामग्री: 11 कलश, बिल्वपत्र, धतूरा। विधि: गणपति पूजन → संकल्प → रुद्र पाठ + अभिषेक → हवन → पूर्णाहुति → ब्राह्मण भोजन। समय: 3-5 घंटे। शुभ: सोमवार/प्रदोष/श्रावण। फल: सर्वपाप नाश, ग्रह शान्ति।
- 1एकादश रुद्र: 11 बार रुद्र पाठ (1 पुरोहित)
- 2एकादश रुद्राभिषेक: 11 पुरोहित × 11 पाठ = 121 बार
- 3महारुद्र: 11 × 121 = 1,331 बार (अत्यन्त विस्तृत)
- 4अतिरुद्र: 11 × 1,331 = 14,641 बार (दुर्लभ)
- 5शिव मंदिर/पुरोहित से सम्पर्क करें
- 6शुभ मुहूर्त — सोमवार, प्रदोष, शिवरात्रि, श्रावण मास उत्तम
- 711 योग्य वेद-पाठी ब्राह्मण/पुरोहित
- 8अभिषेक सामग्री और पूजा सामग्री
- 911 कलश — जल, दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल, पंचामृत, शक्कर जल, चंदन जल, गन्ना रस, नारियल जल
- 10बिल्वपत्र (अधिक मात्रा), धतूरा, आक पुष्प, शमी पत्र
- 11रुद्राक्ष माला
- 12हवन सामग्री (दशांश हवन हेतु)
- 13गणपति पूजन (प्रारम्भ)
- 14कलश स्थापना (11 कलश)
- 15संकल्प (यजमान — नाम, गोत्र, उद्देश्य)
- 1611 पुरोहित एक साथ रुद्राष्टाध्यायी पाठ
- 17प्रत्येक अनुवाक के बाद अभिषेक
- 1811 बार सम्पूर्ण पाठ = एकादश रुद्राभिषेक
- 19दशांश हवन (121 का 10% = ~13 आहुतियाँ न्यूनतम)
- 20पूर्णाहुति — नारियल + घी
- 21महा-आरती
- 22ब्राह्मण भोजन और दक्षिणा
- 23सर्वपाप नाश
- 24ग्रह दोष शान्ति (विशेषतः शनि, राहु)
- 25रोग निवारण
- 26शत्रु विजय
- 27धन-यश-सन्तान प्राप्ति
- 28मोक्ष मार्ग प्रशस्त