मंदिर में गोदान करने का क्या फल मिलता है?
की चेकलिस्ट
गोदान = सर्वोच्च दान। फल: सर्वपाप नाश, वैतरणी पार (गरुड पुराण), स्वर्ग, पितर तृप्ति, लक्ष्मी कृपा। 33 कोटि देवता प्रसन्न। विधि: स्वस्थ गाय+बछड़ा → स्नान → संकल्प → योग्य पात्र/गौशाला को। आधुनिक: गौशाला धनदान/गो-सेवा = समकक्ष। उचित देखभाल सुनिश्चित अनिवार्य।
- 1शुभ मुहूर्त (अमावस्या, एकादशी, संक्रांति, ग्रहण) — विशेष
- 2स्वस्थ, दुधारू, बछड़े सहित गाय — सर्वोत्तम
- 3गाय को स्नान कराएँ, सींगों पर सोना/चाँदी बाँधें, वस्त्र ओढ़ाएँ
- 4संकल्प मंत्र बोलें
- 5योग्य ब्राह्मण/गौशाला/सेवा संस्थान को दान करें
- 6गाय की उचित देखभाल सुनिश्चित करें (केवल दान कर भूल न जाएँ)
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श्रेणी
मंदिर दान
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