मंदिर से बाहर निकलते समय घंटी बजानी चाहिए या नहीं?
की चेकलिस्ट
वर्जित। श्लोक: 'गमनार्थं तु राक्षसाम्' — बाहर जाते घंटी = राक्षस गमन। प्रवेश = आवाहन। बाहर = मौन विदाई। 2-3 बार पर्याप्त।
- 1श्लोक: 'आगमार्थं तु देवानां, गमनार्थं तु राक्षसाम्' — घंटी = देवता आवाहन। बाहर जाते = विदाई — विदाई में घंटी = 'राक्षस गमन' अर्थ।
- 2प्रवेश = आमंत्रण: घंटी = 'हे प्रभु, मैं आया हूं।' बाहर = पूजा पूर्ण — अब मौन विदाई।
- 3ऊर्जा: प्रवेश = ऊर्जा लेना। बाहर = ऊर्जा लेकर जाना — घंटी = ऊर्जा बिखेर सकती है।
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