मंत्र जप और नाम जप में क्या अंतर है?
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मंत्र जप: विशिष्ट संस्कृत, शुद्ध उच्चारण, विधि-नियम, कुछ में दीक्षा, शक्ति=ध्वनि+भाव। नाम जप: सीधा नाम (राम/कृष्ण), सरल, कोई बंधन नहीं, दीक्षा नहीं, शक्ति=भक्ति+प्रेम। 'कलौ नामैव केवलम्' — कलियुग में नाम सर्वश्रेष्ठ।
- 1विशिष्ट संस्कृत मंत्र (बीज मंत्र, वैदिक मंत्र, तांत्रिक मंत्र)।
- 2उदाहरण: 'ॐ नमः शिवाय', 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे'।
- 3शुद्ध उच्चारण अत्यंत महत्वपूर्ण — स्वर भेद से अर्थ बदले।
- 4विधि-नियम बद्ध — माला, दिशा, समय, आसन।
- 5कुछ मंत्रों में गुरु दीक्षा आवश्यक।
- 6शक्ति: ध्वनि कंपन (vibration) + भाव।
- 7भगवान का सीधा नाम — 'राम', 'कृष्ण', 'शिव', 'दुर्गा'।
- 8उदाहरण: 'राम राम', 'हरे कृष्ण', 'जय माता दी'।
- 9उच्चारण सरल — कोई स्वर भेद दोष नहीं।
- 10कोई विधि-नियम बंधन नहीं — कहीं भी, कभी भी, कैसे भी।
- 11दीक्षा अनिवार्य नहीं — सबका अधिकार।
- 12शक्ति: भक्ति भाव + प्रेम।
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