मंत्र जप करते समय आंखें बंद करनी चाहिए?
की चेकलिस्ट
आँखें बंद — श्रेष्ठ (प्रत्याहार, आंतरिक दर्शन, एकाग्रता)। आँखें खुली — त्राटक जप में या ऊँघ आने पर। गीता: नाक की नोक पर दृष्टि — मध्यम मार्ग। महत्वपूर्ण: आँखों से अधिक मन का इष्ट देव पर होना।
- 1प्रत्याहार: पातंजल योग — 'इंद्रियों को बाहर से खींचकर भीतर लाना।' आँखें बंद = दृष्टि इंद्री का निग्रह।
- 2आंतरिक दर्शन: आँखें बंद होने पर मन में इष्ट देव का स्वरूप स्पष्ट दिखता है।
- 3एकाग्रता: बाहरी दृश्यों का विक्षेप नहीं।
- 4त्राटक जप: मूर्ति को एकाग्रता से देखते हुए जप — यह 'खुली आँख' का ध्यान है।
- 5ऊँघ आए: यदि आँखें बंद करने पर नींद आए — आधी खुली या पूरी खुली रखें।
- 6प्रारंभिक साधक: मूर्ति देखते हुए जप करना — ध्यान बनाए रखने में सहायक।
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