मंत्र जप के दौरान कौन सा आसन उपयोग करें?
की चेकलिस्ट
जप के लिए: सिद्धासन (सर्वोत्तम — ऊर्जा ऊर्ध्वगामी), पद्मासन (द्वितीय), सुखासन (सामान्य)। नीचे: ऊनी कम्बल/कुशासन (प्लास्टिक वर्जित)। रीढ़ सीधी, माला गोमुखी में। पातञ्जल: स्थिर और सुखद आसन। पूरे अनुष्ठान में एक ही आसन।
- 1आसन वह हो जो स्थिर और सुखद हो। प्रयत्न शिथिल हो और अनंत में चित्त लीन हो।
- 2हाथ: गोमुखी में माला (थैली में ढकी हुई) — या गोद में हाथ
- 3रीढ़: सीधी — झुकी हुई रीढ़ = ऊर्जा का क्षरण
- 4आँखें: अर्धखुली या बंद
- 5सिर: थोड़ा आगे झुका (जालंधर बंध — ऊर्जा को नीचे न जाने देता है)
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