की चेकलिस्ट
स्पंद कारिका: मंत्र = दिव्य स्पंद का जागरण। प्रक्रिया: ध्वनि से चक्र-जागरण (लं-वं-रं-यं-हं-ॐ), कुण्डलिनी का स्पर्श, प्राण-संचय, अनाहत नाद (भागवत 11.14.24)। क्रम: हाथों में उष्णता → रीढ़ में विद्युत → प्रकाश-आनंद। अनुभव की खोज न करें — जप करें।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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