मंत्र जप में 108 संख्या का महत्व क्या है?
की चेकलिस्ट
108 का महत्व: सूर्य-पृथ्वी = सूर्य व्यास × 108 (खगोल)। 12 राशि × 9 ग्रह = 108 (ज्योतिष)। 108 उपनिषद, शक्तिपीठ (वेद)। 108 मर्म स्थान (आयुर्वेद)। 108 नाड़ी केंद्र (तंत्र)। 10,800 दैनिक श्वास ÷ 100 = 108 (योग)।
- 1सूर्य-पृथ्वी दूरी = सूर्य व्यास का 108 गुणा
- 2चंद्र-पृथ्वी दूरी = चंद्र व्यास का 108 गुणा
- 3यह अनुपात ब्रह्मांड की संरचना में है
- 4108 उपनिषद
- 5108 शक्तिपीठ
- 6108 वैष्णव दिव्य देशम (तीर्थ)
- 7विष्णु के 108 नाम
- 81 = ब्रह्म (एकता)
- 92² = भौतिक द्वैत
- 103³ = त्रिगुण (सत, रज, तम)
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108 का महत्व
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