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108 का महत्व📜 वेद — 108 का महत्व, ज्योतिष शास्त्र, आयुर्वेद, तंत्र शास्त्र2 मिनट पठन

मंत्र जप में 108 संख्या का महत्व क्या है?

संक्षिप्त उत्तर

108 का महत्व: सूर्य-पृथ्वी = सूर्य व्यास × 108 (खगोल)। 12 राशि × 9 ग्रह = 108 (ज्योतिष)। 108 उपनिषद, शक्तिपीठ (वेद)। 108 मर्म स्थान (आयुर्वेद)। 108 नाड़ी केंद्र (तंत्र)। 10,800 दैनिक श्वास ÷ 100 = 108 (योग)।

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विस्तृत उत्तर

108 की संख्या का महत्व वैदिक, ज्योतिषीय, आयुर्वेदिक और वैज्ञानिक सभी दृष्टियों से है:

खगोलीय

  • सूर्य-पृथ्वी दूरी = सूर्य व्यास का 108 गुणा
  • चंद्र-पृथ्वी दूरी = चंद्र व्यास का 108 गुणा
  • यह अनुपात ब्रह्मांड की संरचना में है

वैदिक

  • 108 उपनिषद
  • 108 शक्तिपीठ
  • 108 वैष्णव दिव्य देशम (तीर्थ)
  • विष्णु के 108 नाम

ज्योतिष

12 राशि × 9 ग्रह = 108

आयुर्वेद

शरीर में 108 मर्म स्थान (vital points)। 108 जप = सभी 108 मर्मों पर ऊर्जा प्रवाह।

गणित

1 × 2² × 3³ = 1 × 4 × 27 = 108

  • 1 = ब्रह्म (एकता)
  • 2² = भौतिक द्वैत
  • 3³ = त्रिगुण (सत, रज, तम)

श्वास

योग शास्त्र: दिन में 21,600 श्वास। रात + दिन = दो भाग। दिन के 12 घंटे = 10,800 श्वास। 10,800 ÷ 100 = 108

तंत्र

शरीर में 108 नाड़ी केंद्र। 108 जप = सभी नाड़ी शुद्ध।

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शास्त्रीय स्रोत
वेद — 108 का महत्व, ज्योतिष शास्त्र, आयुर्वेद, तंत्र शास्त्र
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