📖
विस्तृत उत्तर
इस कथा के अनुसार ब्रह्मांड बनने का क्रम महाप्रलय के शून्य से शुरू होता है। पहले कारण-जल में भगवान विष्णु योगनिद्रा में स्थित रहते हैं। फिर सृजन-संकल्प से स्पंदन, स्पंदन से आदिनाद और आदिनाद से ब्रह्मांडीय ऊर्जा जागती है। विष्णु की प्रथम श्वास से कालचक्र चलता है, पंचभूत बनते हैं, ब्रह्मा प्रकट होते हैं और फिर वराह अवतार पृथ्वी को स्थापित करते हैं।
🔗
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक
इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें
क्या यह उत्तर सहायक था?