विस्तृत उत्तर
108 की संख्या का महत्व वैदिक, ज्योतिषीय और वैज्ञानिक — तीनों दृष्टियों से है:
1खगोलीय महत्व
- ▸सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी = सूर्य के व्यास का 108 गुणा
- ▸चंद्र और पृथ्वी के बीच की दूरी = चंद्र के व्यास का 108 गुणा
- ▸यह संख्या ब्रह्मांड की संरचना में है
2वैदिक महत्व
- ▸108 उपनिषद हैं
- ▸108 पुराण उप-कथाएं
- ▸108 शक्तिपीठ
- ▸12 राशि × 9 ग्रह = 108
3शारीरिक महत्व (आयुर्वेद)
आयुर्वेद में शरीर के 108 मर्म स्थान (vital points) हैं। 108 जप = शरीर के सभी 108 मर्म स्थानों पर ऊर्जा प्रवाह।
4गणितीय
108 = 1 × 2² × 3³ = 4 × 27
- ▸1 = एकता (ब्रह्म)
- ▸0 = शून्य (माया)
- ▸8 = अनंत (∞)
5श्वास
योग शास्त्र: एक दिन में 21,600 श्वास। दिन के 12 घंटे = 10,800 श्वास। 10,800 ÷ 100 = 108। 108 जप = ब्रह्मांडीय श्वास लय के साथ।
6तंत्र
तंत्र शास्त्र में शरीर के 108 नाड़ी केंद्र हैं। 108 जप — सभी नाड़ियाँ शुद्ध होती हैं।





