ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
📿
धर्म-संबंधी शंका हो? शास्त्रों में उत्तर है।
पौराणिक प्रश्नोत्तरी — वेद, पुराण और तंत्र-शास्त्रों से प्रमाणित उत्तर, सरल हिंदी में
सभी प्रश्न देखें →
108 का महत्व⏱ 2 मिनट पठन

जप माला में 108 मनके क्यों होते हैं?

108 क्यों: सूर्य-पृथ्वी दूरी = सूर्य व्यास का 108 गुणा (खगोलीय)। 12 राशि × 9 ग्रह = 108 (ज्योतिष)। 108 उपनिषद, 108 शक्तिपीठ।

संक्षिप्त उत्तर

108 क्यों: सूर्य-पृथ्वी दूरी = सूर्य व्यास का 108 गुणा (खगोलीय)। 12 राशि × 9 ग्रह = 108 (ज्योतिष)। 108 उपनिषद, 108 शक्तिपीठ। शरीर में 108 मर्म स्थान (आयुर्वेद)। 1+0+8 = 9 (ब्रह्मांडीय संख्या)। 108 जप = ब्रह्मांडीय सामंजस्य।

📖

विस्तृत उत्तर

108 की संख्या का महत्व वैदिक, ज्योतिषीय और वैज्ञानिक — तीनों दृष्टियों से है:

1खगोलीय महत्व

  • ▸सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी = सूर्य के व्यास का 108 गुणा
  • ▸चंद्र और पृथ्वी के बीच की दूरी = चंद्र के व्यास का 108 गुणा
  • ▸यह संख्या ब्रह्मांड की संरचना में है

2वैदिक महत्व

  • ▸108 उपनिषद हैं
  • ▸108 पुराण उप-कथाएं
  • ▸108 शक्तिपीठ
  • ▸12 राशि × 9 ग्रह = 108

3शारीरिक महत्व (आयुर्वेद)

आयुर्वेद में शरीर के 108 मर्म स्थान (vital points) हैं। 108 जप = शरीर के सभी 108 मर्म स्थानों पर ऊर्जा प्रवाह।

4गणितीय

108 = 1 × 2² × 3³ = 4 × 27

  • ▸1 = एकता (ब्रह्म)
  • ▸0 = शून्य (माया)
  • ▸8 = अनंत (∞)

5श्वास

योग शास्त्र: एक दिन में 21,600 श्वास। दिन के 12 घंटे = 10,800 श्वास। 10,800 ÷ 100 = 108। 108 जप = ब्रह्मांडीय श्वास लय के साथ।

6तंत्र

तंत्र शास्त्र में शरीर के 108 नाड़ी केंद्र हैं। 108 जप — सभी नाड़ियाँ शुद्ध होती हैं।

🔗

आगे क्या पढ़ें

प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी लिंक

इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें
WhatsApp
क्या यह उत्तर सहायक था?

🏷 सम्बंधित विषय

108मनकेकारणब्रह्मांड
📚

विस्तार से पढ़ें

इस विषय पर हमारे विस्तृत लेख और मार्गदर्शिकाएँ

जप माला में 108 मनके क्यों होते हैं — शास्त्रों के अनुसार

पौराणिक पर आपको 108 का महत्व से जुड़े प्रमाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। अन्य प्रश्नों के लिए प्रश्नोत्तरी पृष्ठ देखें।

🙏 पूजा विधि📿 मंत्र जाप🔱 शिव पूजा🏠 वास्तु💭 सपनों का मतलब🪐 ज्योतिष

इसी विषय पर और प्रश्नोत्तर

टैग द्वारा खोजें:#108#मनके#कारण#ब्रह्मांड