विस्तृत उत्तर
रुद्राक्ष माला शिव पूजा में जप के लिए सर्वश्रेष्ठ माध्यम है। शिव पुराण के अनुसार रुद्राक्ष भगवान शिव के नेत्रों के अश्रु (जल बिंदु) से उत्पन्न हुए:
माला की संख्या
- ▸108+1 मनके — सर्वोत्तम (108 जप मनके + 1 सुमेरु)।
- ▸54 मनके — भी स्वीकार्य।
- ▸27 मनके — न्यूनतम।
जप विधि
- 1स्नान कर शुद्ध अवस्था में बैठें।
- 2माला को दाहिने हाथ की मध्यमा (बीच की) उंगली पर रखें।
- 3अंगूठे से मनके गिनें — तर्जनी (index finger) का प्रयोग कभी न करें (वर्जित)।
- 4'ॐ नमः शिवाय' या महामृत्युंजय मंत्र जपते हुए एक-एक मनका आगे बढ़ाएं।
- 5सुमेरु (मुख्य मनका) पार न करें — 108 मनके पूरे होने पर माला पलटकर (उलटकर) पुनः जप आरंभ करें।
- 6जप के दौरान माला को नाभि से नीचे न ले जाएं।
- 7जप गोमुखी (कपड़े की थैली) में करना उत्तम — माला दूसरों को दिखानी नहीं चाहिए।
रुद्राक्ष का चयन
- ▸पंचमुखी रुद्राक्ष — शिव पूजा के लिए सर्वोत्तम और सर्वसुलभ।
- ▸आंवले के समान गोल, भारी रुद्राक्ष उत्तम।
- ▸रुद्राक्ष स्पष्ट मुखी (facets) और बिना दरार वाला हो।
माला की शुद्धि
- ▸नई माला को पहले गंगाजल और दूध से धोएं।
- ▸'ॐ नमः शिवाय' 108 बार जपकर अभिमंत्रित करें।
- ▸माला को शुद्ध स्थान पर रखें — अपवित्र स्थान पर न रखें।
नियम
- ▸रुद्राक्ष माला पहनकर शौचालय न जाएं — उतारकर रखें।
- ▸सोते समय माला उतार सकते हैं (कुछ परंपराओं में पहनकर सोना भी शुभ)।
- ▸मांसाहार, मद्यपान के समय माला न पहनें।





