विस्तृत उत्तर
श्रावण में महामृत्युंजय जप विशेष फलदायी:
मंत्र: 'ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥'
दैनिक जप विधि
- 1प्रातः/संध्या — स्नान बाद, शुद्ध वस्त्र।
- 2शिवलिंग/शिव चित्र समक्ष, उत्तर/पूर्व मुख।
- 3रुद्राक्ष माला (108 दाने)।
- 4108 बार (1 माला) = न्यूनतम। 1008 (10 माला) = उत्तम।
- 5उपांशु (फुसफुसाकर) जप सर्वोत्तम।
- 6जप पूर्ण होने पर शिवलिंग पर जल चढ़ाएं।
अनुष्ठान (विशेष)
- ▸सवा लाख (1,25,000) जप = पूर्ण अनुष्ठान — सावन में आरंभ।
- ▸40 दिन नियमित — सात्विक आहार, ब्रह्मचर्य।
- ▸समापन: हवन, दान।
लाभ: मृत्यु भय निवारण, अकाल मृत्यु रक्षा, रोग मुक्ति, ग्रह दोष शांति, शत्रु नाश।
ऋग्वेद (7.59.12): मार्कण्डेय ऋषि ने इसी मंत्र से यमराज पर विजय पाई।





