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शिव मंत्र📜 ऋग्वेद (7.59.12), शिव पुराण, मंत्र शास्त्र1 मिनट पठन

श्रावण मास में महामृत्युंजय मंत्र का जप कैसे करें?

संक्षिप्त उत्तर

'ॐ त्र्यम्बकं यजामहे...' — 108 बार (माला) दैनिक। उपांशु, रुद्राक्ष माला, उत्तर/पूर्व मुख। अनुष्ठान: सवा लाख + 40 दिन। मार्कण्डेय ने यम पर विजय पाई (ऋग्वेद 7.59.12)। मृत्यु भय + रोग + ग्रह दोष निवारण।

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विस्तृत उत्तर

श्रावण में महामृत्युंजय जप विशेष फलदायी:

मंत्र: 'ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥'

दैनिक जप विधि

  1. 1प्रातः/संध्या — स्नान बाद, शुद्ध वस्त्र।
  2. 2शिवलिंग/शिव चित्र समक्ष, उत्तर/पूर्व मुख।
  3. 3रुद्राक्ष माला (108 दाने)।
  4. 4108 बार (1 माला) = न्यूनतम। 1008 (10 माला) = उत्तम।
  5. 5उपांशु (फुसफुसाकर) जप सर्वोत्तम।
  6. 6जप पूर्ण होने पर शिवलिंग पर जल चढ़ाएं।

अनुष्ठान (विशेष)

  • सवा लाख (1,25,000) जप = पूर्ण अनुष्ठान — सावन में आरंभ।
  • 40 दिन नियमित — सात्विक आहार, ब्रह्मचर्य।
  • समापन: हवन, दान।

लाभ: मृत्यु भय निवारण, अकाल मृत्यु रक्षा, रोग मुक्ति, ग्रह दोष शांति, शत्रु नाश।

ऋग्वेद (7.59.12): मार्कण्डेय ऋषि ने इसी मंत्र से यमराज पर विजय पाई।

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शास्त्रीय स्रोत
ऋग्वेद (7.59.12), शिव पुराण, मंत्र शास्त्र
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