मंत्र जप में अनुलोम विलोम प्राणायाम का क्या उपयोग है?
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अनुलोम-विलोम जप में: नाड़ी शुद्धि (इड़ा-पिंगला संतुलन), मन शांत (एकाग्रता), प्राण वृद्धि (मंत्र शक्ति), सुषुम्ना जागरण (गहन साधना)। जप से 5-10 मिनट पहले करें। क्रम: स्नान → आसन → प्राणायाम → संकल्प → जप।
- 1नाड़ी शुद्धि: अनुलोम-विलोम से इड़ा (बायीं) और पिंगला (दाहिनी) नाड़ियाँ शुद्ध और संतुलित होती हैं। शुद्ध नाड़ियाँ = मंत्र शक्ति का सही प्रवाह।
- 2मन शांत: श्वास नियंत्रण से मन शांत होता है। शांत मन = एकाग्र जप। 'योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः' (योगसूत्र 1.2)।
- 3प्राण ऊर्जा: प्राणायाम से प्राण शक्ति बढ़ती है। प्राण + मंत्र = शक्तिशाली साधना। बिना प्राण के मंत्र = बिना ईंधन के अग्नि।
- 4सुषुम्ना जागरण: दोनों नाड़ियाँ संतुलित होने पर प्राण सुषुम्ना नाड़ी (केन्द्रीय) में प्रवेश करता है = गहन ध्यान और उच्च साधना सम्भव।
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मंत्र साधना
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