मंत्र जप में ग्रहण काल का क्या विशेष महत्व है?
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ग्रहण जप = लाख गुना फल। अथर्वशीर्ष: 'सूर्यग्रहे जप्त्वा सिद्धमंत्रो भवति।' विधि: स्पर्श→मोक्ष निरंतर जप, स्नान, जल में खड़े। भोजन/शयन वर्जित। सूर्य ग्रहण: गायत्री/आदित्य। चंद्र: शिव मंत्र। गर्भवती: सावधानी। मंत्र सिद्धि का सर्वोत्तम अवसर।
- 1ग्रहण स्पर्श (आरंभ) से मोक्ष (समाप्ति) तक निरंतर जप।
- 2स्नान कर शुद्ध होकर बैठें।
- 3इष्ट मंत्र या गायत्री मंत्र जपें।
- 4जल में खड़े होकर जप (नदी/तालाब) — विशेष फलदायी।
- 5ग्रहण समाप्ति पर पुनः स्नान।
- 6ग्रहण काल में भोजन, शयन, मैथुन वर्जित।
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