हां, संभव। बीज मंत्र (लं, वं, रं, यं, हं, ॐ) चक्र सक्रिय करते हैं। शक्ति बीज (ऐं, ह्रीं, क्लीं) कुण्डलिनी जागृत। गुरु अनिवार्य — बिना तैयारी हानिकारक। मंत्र = क्रमिक, सुरक्षित विधि। वर्षों की साधना — रातोंरात नहीं।
- 1बीज मंत्र और चक्र: प्रत्येक चक्र का एक बीज मंत्र है — 'लं' (मूलाधार), 'वं' (स्वाधिष्ठान), 'रं' (मणिपूर), 'यं' (अनाहत), 'हं' (विशुद्ध), 'ॐ' (अज्ञा)। इन बीजों के जप से संबंधित चक्र सक्रिय होता है।
- 2'ॐ' जप: प्रणव (ॐ) सभी चक्रों को एक साथ सक्रिय करता है।
- 3शक्ति मंत्र: 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं' — शक्ति बीज कुण्डलिनी को जागृत करते हैं।
- 4गायत्री मंत्र: 24 अक्षर = 24 शक्ति केंद्र — गायत्री जप कुण्डलिनी प्रक्रिया को प्रेरित करता है।