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मोक्ष प्राप्ति के चार मार्ग कौन से हैं

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चार मार्ग: ज्ञान योग (आत्म-ज्ञान — शंकराचार्य), भक्ति योग (ईश्वर समर्पण — गीता 12.6), कर्म योग (निष्काम कर्म — गीता 2.47), राज योग (ध्यान-समाधि — पतंजलि)। ये परस्पर पूरक हैं। गीता 18.66 — भगवान की शरण = सर्वपाप मुक्ति।

  1. 1सार — आत्म-ज्ञान के द्वारा मोक्ष। 'मैं शरीर नहीं, आत्मा हूं' — इस सत्य का साक्षात्कार।
  2. 2गीता संदर्भ — अध्याय 2, 3, 4, 13, 18
  3. 3प्रमुख आचार्य — आदि शंकराचार्य (अद्वैत वेदांत)
  4. 4साधन — श्रवण (सुनना), मनन (विचार करना), निदिध्यासन (ध्यान करना)
  5. 5उपयुक्त — तीव्र बुद्धि, वैराग्य और विवेक वाले साधकों के लिए
  6. 6सार — ईश्वर के प्रति पूर्ण प्रेम और समर्पण।
  7. 7गीता संदर्भ — अध्याय 7, 9, 11, 12, 18
  8. 8गीता 12.6-7 — 'ये तु सर्वाणि कर्माणि मयि संन्यस्य मत्पराः...' — जो सब कर्म मुझमें अर्पित करके मेरे परायण हैं, उनका मैं शीघ्र उद्धार करता हूं।
  9. 9प्रमुख आचार्य — रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, चैतन्य महाप्रभु
  10. 10उपयुक्त — सभी के लिए, सरलतम मार्ग
  11. 11सार — निष्काम कर्म (फल की आसक्ति के बिना कर्म करना)।
  12. 12गीता 2.47 — 'कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन' — कर्म करो, फल की चिंता मत करो।
  13. 13गीता संदर्भ — अध्याय 3, 5, 18
  14. 14उपयुक्त — गृहस्थ और कर्मशील व्यक्तियों के लिए
  15. 15सार — ध्यान, प्राणायाम और समाधि द्वारा चित्त वृत्ति निरोध।
  16. 16पतंजलि योगसूत्र — 'योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः' (1.2)
  17. 17अष्टांग — यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान, समाधि
  18. 18गीता संदर्भ — अध्याय 6 (ध्यान योग)
  19. 19उपयुक्त — अनुशासित और ध्यान-प्रवृत्त साधकों के लिए
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आत्मा और मोक्ष

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