की चेकलिस्ट
चार मार्ग: ज्ञान योग (आत्म-ज्ञान — शंकराचार्य), भक्ति योग (ईश्वर समर्पण — गीता 12.6), कर्म योग (निष्काम कर्म — गीता 2.47), राज योग (ध्यान-समाधि — पतंजलि)। ये परस्पर पूरक हैं। गीता 18.66 — भगवान की शरण = सर्वपाप मुक्ति।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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