मृत्यु के बाद गाय दान क्यों करते हैं?
की चेकलिस्ट
गरुड़ पुराण: वैतरणी नदी पार कराने गाय पूँछ पकड़ाती है। गाय = देवमाता (33 कोटि देव)। गो-दान = सबसे बड़ा दान, पाप क्षय। गाय न हो = गौशाला दान/धन दान। भाव प्रधान।
- 1वैतरणी नदी: मृत्यु के बाद आत्मा को यमलोक जाते समय वैतरणी नदी (रक्त-पूय से भरी भयानक नदी) पार करनी होती है। गो-दान करने वाले की गाय आत्मा को पूँछ पकड़ाकर इस नदी को पार कराती है।
- 2गाय = देवमाता: गाय में 33 कोटि (प्रकार) देवता। गो-दान = सबसे बड़ा दान।
- 3पाप क्षय: गो-दान से मृतक के पापों का क्षय।
- 4पितृ तृप्ति: गाय = पितरों तक भोजन पहुँचाने का माध्यम।
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