पार्वती के 108 नाम और तीन श्रेणियाँ: (1) सौम्य रूप — गौरी, अन्नपूर्णा, महागौरी (मातृत्व-करुणा); (2) उग्र रूप — दुर्गा, महाकाली, चंडी (संहार-न्याय); (3) तपस्विनी रूप — ब्रह्मचारिणी, अपर्णा (ज्ञान-वैराग्य-मोक्ष)।
- 1सौम्य रूप (मातृत्व, करुणा और पोषण): गौरी, अन्नपूर्णा, महागौरी और शैलपुत्री। इन रूपों में माता पार्वती वात्सल्य, प्रेम, अन्न, समृद्धि और असीम करुणा की अधिष्ठात्री हैं। यह स्वरूप उस सृजनात्मक ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करता है जो विश्व का पालन-पोषण करती है।
- 2शक्ति और उग्र रूप (संहार, न्याय और परिवर्तन): दुर्गा, महाकाली, चंडी, भवानी और कालरात्रि। जब ब्रह्मांड में आसुरी शक्तियों का उदय होता है और धर्म पर संकट आता है, तब देवी पार्वती विनाशकारी और भयानक रूप धारण कर धर्म की पुनः स्थापना करती हैं। दुर्गा नाम उन्हें दुर्गम नामक असुर का वध करने के कारण प्राप्त हुआ था।
- 3तपस्विनी रूप (ज्ञान, तप और वैराग्य): ब्रह्मचारिणी, अपर्णा, यति। यह स्वरूप विशुद्ध ज्ञान, सर्वोच्च बुद्धि, तपस्या और आत्म-नियंत्रण का साक्षात प्रतीक है, जो साधकों को मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है।