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हाँ, गीता (5.18): ज्ञानी ब्राह्मण, गाय, हाथी, कुत्ते में समान आत्मा देखते हैं। ईशोपनिषद: सम्पूर्ण जगत में ईश्वर व्याप्त। सभी जीवों में एक समान आत्मा, शरीर भिन्न। कर्मानुसार 84 लाख योनियों में जन्म। यही अहिंसा का मूल आधार।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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