पशु पक्षियों में भी आत्मा होती है क्या?
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हाँ, गीता (5.18): ज्ञानी ब्राह्मण, गाय, हाथी, कुत्ते में समान आत्मा देखते हैं। ईशोपनिषद: सम्पूर्ण जगत में ईश्वर व्याप्त। सभी जीवों में एक समान आत्मा, शरीर भिन्न। कर्मानुसार 84 लाख योनियों में जन्म। यही अहिंसा का मूल आधार।
- 1भगवद्गीता (5.18): *'विद्याविनयसम्पन्ने ब्राह्मणे गवि हस्तिनि, शुनि चैव श्वपाके च पण्डिताः समदर्शिनः'*
- 2ईशोपनिषद: *'ईशावास्यमिदं सर्वं'* — इस संपूर्ण जगत में ईश्वर (आत्मा) व्याप्त है — प्रत्येक जीव में।
- 3छांदोग्य उपनिषद: *'तत्त्वमसि'* (तू वही है) — यह महावाक्य सभी जीवों की आत्मा की एकता को दर्शाता है।
- 4गीता (2.20): *'न जायते म्रियते वा कदाचिन्'* — आत्मा न जन्मती है न मरती है — यह सभी जीवों पर लागू है।
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आत्मा सिद्धांत
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