तुलना अनुचित। वैदिक: वेद, अपौरुषेय, स्वर कठोर, ज्ञान/मोक्ष। पौराणिक: पुराण/स्तोत्र, ऋषि/संत रचित, सरल, भक्ति। दोनों प्रभावी — उद्देश्य अनुसार। भक्ति भाव = सबसे बड़ा प्रभाव कारक — स्रोत गौण।
- 1स्रोत: चारों वेद (ऋग, यजुर, साम, अथर्व)।
- 2उदाहरण: गायत्री, महामृत्युंजय, पुरुष सूक्त, श्री सूक्त।
- 3'अपौरुषेय' (मानव रचित नहीं) — ऋषि द्रष्टा (देखने वाले), रचयिता नहीं।
- 4स्वर नियम कठोर — शुद्ध उच्चारण अनिवार्य।
- 5सर्वमान्य, सर्वकालिक।
- 6स्रोत: 18 पुराण, उपपुराण, स्तोत्र, चालीसा।
- 7उदाहरण: विष्णु सहस्रनाम (महाभारत), हनुमान चालीसा (तुलसीदास), ललिता सहस्रनाम (ब्रह्माण्ड पुराण)।
- 8ऋषि/संत रचित — लोक भाषा में भी (चालीसा)।
- 9उच्चारण सरल — स्वर नियम शिथिल।
- 10भक्ति प्रधान।
- 11दोनों प्रभावी — उद्देश्य अनुसार चयन।
- 12वैदिक = ज्ञान, मोक्ष, यज्ञ, शुद्धि — शुद्ध उच्चारण से।
- 13पौराणिक = भक्ति, कल्याण, सुलभता — भाव से।
- 14भक्ति भाव = सबसे बड़ा प्रभाव कारक — मंत्र का स्रोत गौण।