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हाँ, याज्ञवल्क्य स्मृति के अनुसार पौत्र (पुत्र का पुत्र = पोता) और दौहित्र (पुत्री का पुत्र = नाती) दोनों समान रूप से अपने पूर्वजों को नरक से तारने की क्षमता रखते हैं। दौहित्र का श्राद्ध पौत्र के श्राद्ध से किसी भी प्रकार कम नहीं।
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