पितृपक्ष में दान देने का शास्त्रीय विधान क्या है?
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पितृपक्ष दान: अन्न (सर्वश्रेष्ठ), वस्त्र, शय्या (बिस्तर), छाता, जूते, गोदान (सर्वोच्च), तिल, जलपूर्ण घड़ा। विधि: स्नान→दक्षिण मुख→संकल्प→दान+दक्षिणा। योग्य पात्र। पितृपक्ष दान = अनेकगुना फल।
- 1अन्न दान (सर्वश्रेष्ठ): चावल, गेहूँ, दालें, तिल, जौ — ब्राह्मण/गरीबों को।
- 2वस्त्र दान: श्वेत वस्त्र, धोती, चादर।
- 3शय्या दान (बिस्तर): खाट/बिस्तर + चादर + तकिया = अत्यंत पुण्यदायी।
- 4छाता दान: 'छत्रदानात् सुखं लोके' — छाता = रक्षा प्रतीक।
- 5जूते/चप्पल दान: पितरों की यात्रा (यमलोक) सुगम हो।
- 6गोदान: सर्वोच्च — वैतरणी पार।
- 7तिल दान: पितृ तृप्ति हेतु अनिवार्य।
- 8जल दान (जलपूर्ण घड़ा): विशेष पुण्यदायी।
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श्रेणी
श्राद्ध-पितृ कर्म
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