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पूर्णिमा पर सत्यनारायण पूजा करने का क्या विधान है?

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सत्यनारायण: पूर्णिमा=शुभ तिथि, विष्णु सत्य स्वरूप। विधि: षोडशोपचार→कथा (5 अध्याय, अनिवार्य)→आरती→प्रसाद (शीरा+केला)। प्रसाद अस्वीकार न करें। अवसर: नया कार्य, गृह प्रवेश, मनोकामना। सरलतम गृहस्थ पूजा।

  1. 1पूर्णिमा = सत्यनारायण तिथि: प्रत्येक पूर्णिमा = सत्यनारायण पूजा हेतु शुभ। विशेषतः कार्तिक, श्रावण, वैशाख पूर्णिमा।
  2. 2सत्यनारायण = विष्णु सत्य स्वरूप: 'सत्य' + 'नारायण' = सत्य स्वरूप विष्णु। इस पूजा से सत्य, धर्म, न्याय की रक्षा।
  3. 3विधि (संक्षिप्त): संकल्प → षोडशोपचार पूजन → पंचामृत → सत्यनारायण कथा (5 अध्याय) श्रवण → आरती → प्रसाद (शीरा/सूजी हलवा + केला + पंचामृत)।
  4. 4कथा महत्व: 5 अध्याय = 5 कथाएँ — सत्य पालन से सुख, असत्य से दुःख। कथा सुनना = पूजा का अनिवार्य अंग।
  5. 5प्रसाद विशेष: सत्यनारायण प्रसाद (शीरा) = अत्यंत पवित्र। अवहेलना करने वालों को दुःख (कथा में वर्णित) — प्रसाद श्रद्धापूर्वक ग्रहण करें, अस्वीकार न करें।
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