प्रकृति और पुरुष में अंतर सांख्य दर्शन अनुसार
की चेकलिस्ट
पुरुष = चेतन, साक्षी, निर्गुण, अपरिवर्तनशील (आत्मा)। प्रकृति = जड़, सक्रिय, त्रिगुणात्मक, परिवर्तनशील (शरीर-मन-जगत)। दुःख = पुरुष का प्रकृति से भ्रमवश तादात्म्य। ज्ञान = 'मैं पुरुष हूं, प्रकृति नहीं' = मोक्ष। 25 तत्व: 24 प्रकृति + 1 पुरुष।
- 1शुद्ध चेतना, साक्षी, अकर्ता (कुछ करता नहीं — केवल देखता है)।
- 2नित्य, निर्विकार, अचल, एक या अनेक (सांख्य में अनेक पुरुष)।
- 3आत्मा = पुरुष।
- 4उपमा: दर्पण (जो सब प्रतिबिंबित करता है पर स्वयं अपरिवर्तित)।
- 5जड़ (अचेतन), सक्रिय, परिवर्तनशील।
- 6तीन गुणों (सत्व, रजस्, तमस्) का संतुलन।
- 7समस्त भौतिक सृष्टि प्रकृति से उत्पन्न — शरीर, मन, बुद्धि, इंद्रियां, पंचभूत — सब प्रकृति।
- 8उपमा: रंगमंच (जहां नाटक होता है — प्रकृति नाटक है, पुरुष दर्शक)।
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श्रेणी
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