पुरश्चरण के दौरान अभिषेक क्यों किया जाता है?
की चेकलिस्ट
पुरश्चरण में अभिषेक (मार्जन): संख्या = तर्पण का 10वाँ। पाँच कारण: देवता का सम्मान-स्नान, साधक-स्थल-मूर्ति शुद्धि, तर्पण-दोष-निवारण, देवता का सान्निध्य, पुरश्चरण की पूर्णता। 'मार्जनं शुद्धिकारकम्' (कुलार्णव)। अभिषेक सामग्री: शिव (दूध-गंगाजल), देवी (मधु-दही), गणपति (पंचामृत)।
- 1देवता का मार्जन (जल-अभिषेक) ही 'मार्जन-अंग' है। यह तर्पण के दशांश में पुरश्चरण में विहित है।
- 2मार्जन = कुश-शाखा से जल छिड़काव — स्वयं पर, स्थान पर, और मूर्ति पर
- 3अभिषेक = देवता-मूर्ति पर पंचामृत या जल-धारा — विशेष पूजन-विधि
- 4शिव: दूध, जल, पंचामृत, गंगाजल
- 5विष्णु: पंचामृत, गंधोदक
- 6देवी: दूध, मधु, दही, गंधोदक
- 7गणपति: दूध, पंचामृत
सम्पूर्ण उत्तर
विस्तृत प्रश्न पृष्ठ देखें
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
श्रेणी
पुरश्चरण
इस श्रेणी के अन्य प्रश्नोत्तर।