निःस्वार्थ सेवा, विनम्रता (शक्ति+विनम्रता), साहस, बुद्धि, पूर्ण समर्पण, एकनिष्ठा, शक्ति+भक्ति=सेवा। आदर्श भक्त=आदर्श सेवक।
- 1निःस्वार्थ सेवा — बिना प्रतिफल; केवल राम प्रसन्नता।
- 2विनम्रता — अपार शक्ति + पूर्ण विनम्रता = 'दासोऽहं कोसलेन्द्रस्य'।
- 3साहस — समुद्र लांघना; लंका दहन; बिना भय।
- 4बुद्धि — सीता खोज में बुद्धि; रावण दरबार में कूटनीति।
- 5समर्पण — 'सीय राम मय सब जग जानी' — सब में राम देखना।
- 6शक्ति + भक्ति — शक्ति अकेली = अहंकार; भक्ति से शक्ति = सेवा।
- 7एकनिष्ठा — केवल राम; कोई अन्य नहीं।