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चेकलिस्ट

संचित कर्म, प्रारब्ध कर्म और क्रियमाण कर्म में क्या अंतर है?

की चेकलिस्ट

संचित = सभी जन्मों के कर्मों का भंडार। प्रारब्ध = संचित का वह भाग जो वर्तमान जीवन में फल दे रहा है (भाग्य)। क्रियमाण = वर्तमान में किए जा रहे कर्म (पुरुषार्थ)। क्रियमाण → संचित → प्रारब्ध — यह चक्र मोक्ष तक चलता है।

  1. 1अनेक पूर्व जन्मों से लेकर वर्तमान तक किए गए सभी कर्मों का संचय/भंडार।
  2. 2ये अनंत हैं (अनंत जन्मों के कर्म)।
  3. 3गीता में संकेत: *'बहूनि मे व्यतीतानि जन्मानि तव चार्जुन'* (4.5) — हमारे बहुत जन्म हो चुके हैं।
  4. 4जब तक संचित कर्म शेष हैं, जन्म-मृत्यु चक्र चलता रहता है।
  5. 5संचित कर्म के भंडार में से वह छोटा हिस्सा जो पककर वर्तमान जीवन में फल देने के लिए तैयार हो गया है।
  6. 6यही वर्तमान जीवन की योनि, परिवार, सुख-दुख निर्धारित करता है।
  7. 7प्रारब्ध को भोगे बिना समाप्त नहीं किया जा सकता — इसे 'भाग्य' भी कहते हैं।
  8. 8तुलसीदास: *'हमारे शरीर के अस्तित्व में आने से बहुत पहले ही हमारी नियति आकार ग्रहण कर लेती है।'*
  9. 9वर्तमान जीवन में किए जा रहे सभी कर्म — सोचना, बोलना, करना।
  10. 10इन पर मनुष्य का स्वतंत्र अधिकार है — विवेक और पुरुषार्थ से इन्हें शुभ दिशा में मोड़ सकते हैं।
  11. 11ये कर्म संचित कर्म में जमा होते रहते हैं और भविष्य (इस या अगले जन्म) में प्रारब्ध बनकर फल देते हैं।
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