आग = मिश्रित। शुभ: हवन अग्नि=पुण्य, दीपक=शांति, ज्ञान प्रकाश। अशुभ: भयंकर आग=धन हानि/कलह, जलना=कष्ट। आयुर्वेद: अग्नि का सपना पित्त दोष वृद्धि का पूर्वलक्षण (चरक संहिता)। शांत अग्नि शुभ, भयंकर अशुभ।
- 1अग्नि देव कृपा — हवन/यज्ञ की अग्नि = पुण्य, शुद्धि।
- 2ज्ञान प्रकाश — अग्नि अंधकार (अज्ञान) दूर करती है; ज्ञान प्राप्ति।
- 3ऊर्जा/उत्साह — जीवन में नई ऊर्जा।
- 4दीपक/ज्योति — शांत लौ = शांति, सुख, मार्गदर्शन।
- 5क्रोध/तनाव — भीतरी क्रोध या तनाव का प्रतिबिंब।
- 6विनाश/हानि — घर/संपत्ति में अग्नि = धन हानि की चेतावनी।
- 7रोग — आयुर्वेद में अग्नि का सपना पित्त दोष वृद्धि का पूर्वलक्षण (purvarupa) माना गया है। चरक संहिता में दोष-अनुसार स्वप्नों का वर्णन है जहां अग्नि, सूर्य, उल्कापात देखना पित्त प्रकृति/पित्त वृद्धि का संकेत है।
- 8परिवार में कलह — आग = गर्मी/तनाव।