'ऐं' = वाग्बीज, बिना दीक्षा सभी जप सकते हैं। विद्यार्थी: प्रतिदिन 108 बार 'ॐ ऐं नमः', पढ़ाई पूर्व 11 बार। परीक्षा काल: 21 दिन पहले से 108 नित्य, परीक्षा दिन 21 बार। स्फटिक/मोती माला। बुधवार/वसंत पंचमी शुभ। मंत्र + मेहनत = सर्वोत्तम परिणाम।
- 1प्रतिदिन सुबह स्नान के बाद।
- 2सरस्वती माता का चित्र/प्रतिमा के सामने बैठें।
- 3'ॐ ऐं नमः' या केवल 'ऐं' 108 बार जपें।
- 4स्फटिक या मोती की माला से जप करें।
- 5जप के बाद पढ़ाई आरंभ करें — एकाग्रता बढ़ेगी।
- 6परीक्षा से 21 दिन पहले से 'ऐं' का 108 बार नियमित जप।
- 7पढ़ाई शुरू करने से पहले 11 बार 'ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः'।
- 8परीक्षा वाले दिन सुबह 21 बार 'ऐं' जपकर जाएं।
- 9'ऐं ह्रीं श्रीं वाग्देव्यै सरस्वत्यै नमः' — 108 बार।
- 10पढ़ा हुआ याद रखने के लिए पढ़ाई के बाद भी 11 बार जपें।
- 11वसंत पंचमी पर 'ऐं' का 1008 बार जप।
- 12नई पुस्तक/कॉपी पर 'ऐं' लिखकर आरंभ करें।
- 13बीज मंत्र 'ऐं' बिना दीक्षा के भी जपा जा सकता है — यह सर्वसुलभ है।
- 14शुद्ध उच्चारण: 'ऐं' = 'ai' + अनुनासिक (ṁ)।
- 15सात्विक आहार, ब्रह्मचर्य और नियमितता से फल शीघ्र।
- 16बुधवार और वसंत पंचमी विशेष।