'ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः' — 'ऐं' = वाग्बीज (सरस्वती बीज)। विधि: प्रातःकाल, श्वेत/पीला वस्त्र, स्फटिक/मोती माला, 108 बार, पूर्व/उत्तर मुख। बुधवार/गुरुवार शुभ। वसंत पंचमी से आरंभ सर्वोत्तम। फल: विद्या, बुद्धि, वाक्शक्ति, स्मृति, परीक्षा सफलता।
- 1'ॐ' = प्रणव (ब्रह्म का प्रतीक)
- 2'ऐं' = सरस्वती बीज (वाग्बीज — वाणी का बीज)
- 3'सरस्वत्यै' = सरस्वती देवी को
- 4'नमः' = नमस्कार/समर्पण
- 5प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त या सूर्योदय के समय सर्वोत्तम।
- 6स्नान करके शुद्ध (श्वेत या पीले) वस्त्र धारण करें।
- 7पूजा स्थान पर सरस्वती माता का चित्र/प्रतिमा रखें।
- 8श्वेत पुष्प, श्वेत चंदन, श्वेत मिठाई (खीर) अर्पित करें।
- 9स्फटिक (क्रिस्टल) माला सर्वोत्तम।
- 10मोती की माला भी शुभ।
- 11तुलसी माला भी प्रयोग कर सकते हैं।
- 12108 बार (1 माला) प्रतिदिन।
- 13पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।
- 14शुद्ध उच्चारण पर विशेष ध्यान दें।
- 15वसंत पंचमी से आरंभ करना सर्वोत्तम।
- 16नित्य जप: 108 बार
- 17विशेष अनुष्ठान: सवा लाख (1,25,000) + दशांश हवन
- 18परीक्षा काल: 21 दिन 108 बार
- 19जप काल में सात्विक आहार।
- 20बुधवार और गुरुवार विशेष शुभ (बुध = बुद्धि, गुरु = ज्ञान)।
- 21वसंत पंचमी, नवरात्रि पंचमी विशेष फलदायी।