वीणा: संगीत/कला, नाद ब्रह्म (ध्वनि=ब्रह्म), जीवन संतुलन, हृदय की भाषा। पुस्तक: ज्ञान/वेद, शाश्वत ज्ञान, बुद्धि-विवेक। संयुक्त: पूर्ण शिक्षा = बुद्धि (पुस्तक) + भाव (वीणा)। अन्य: जपमाला=ध्यान, हंस=विवेक, श्वेत=शुद्धता।
- 1संगीत और कला: वीणा संगीत का प्रतीक। सरस्वती = संगीत, नृत्य और सभी ललित कलाओं की अधिष्ठात्री।
- 2नाद ब्रह्म: वीणा से निकलने वाला स्वर 'नाद' (ध्वनि) है — 'नादं ब्रह्मेति' — ध्वनि ही ब्रह्म है। ॐ = आदि नाद।
- 3जीवन का संतुलन: वीणा के तार न अत्यधिक कसे हों, न ढीले — जीवन में भी संतुलन आवश्यक। (बुद्ध ने भी यही कहा — मध्यम मार्ग।)
- 4हृदय की भाषा: संगीत वह भाषा है जो बुद्धि से परे हृदय को स्पर्श करती है।
- 5ज्ञान और विद्या: पुस्तक = वेद/ज्ञान का प्रतीक। सरस्वती = वेदमाता, विद्या की अधिष्ठात्री।
- 6शाश्वत ज्ञान: पुस्तक = लिखित/संरक्षित ज्ञान जो पीढ़ी दर पीढ़ी हस्तांतरित होता है।
- 7बुद्धि और विवेक: ज्ञान = अंधकार में प्रकाश। 'तमसो मा ज्योतिर्गमय।'